Dhanushdhari Hanuman Temple Akedadoongar Jaipur

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धनुषधारी हनुमान मंदिर आकेडा डूंगर जयपुर


जयपुर शहर के पास ही अरावली की सुरम्य पहाड़ियों के बीच कई अनदेखे ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थल मौजूद हैं. इन्ही में से एक धार्मिक स्थल का नाम है धनुषधारी हनुमान मंदिर.

Dhanushdhari hanuman mandir how to reach


रेलवे स्टेशन से यह मंदिर लगभग 17 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. यहाँ पहुँचने के लिए पथरीली सड़क युक्त दो रास्ते हैं जिन पर बाइक या जीप से जाया जा सकता है.

एक रास्ता विद्याधर नगर से विश्वकर्मा इंडस्ट्रियल एरिया होते हुए तथा दूसरा रास्ता नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क के बगल से लायन सफारी के सामने से होते हुए सिसियावास गाँव में से होकर निकलता है.

आमेर तहसील में स्थित यह मंदिर चारों तरफ से रेत के बड़े-बड़े टीलों एवं पहाड़ियों से घिरा हुआ है. इस मंदिर के पास की पहाड़ी को आकेडा डूंगर के नाम से जाना जाता है. यह जगह धार्मिक स्थल के साथ-साथ एक बेहतरीन पर्यटक स्थल भी है.

How dhanushdhari hanuman mandir built?


पिछले सोलह वर्षों से मंदिर की सेवा पूजा का काम रामबाबू सँभालते हैं. इनके अनुसार राजाओं के जमाने में किसी राजा ने यहाँ पर बाघ से युद्ध करके उसे मार दिया था. बाद में बाघ पर विजय के प्रतीक स्वरुप इस मंदिर का निर्माण करवाया गया.

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इस मंदिर को धनुषधारी हनुमान मंदिर के अलावा बाघ बाघड़ी हनुमान मंदिर एवं निर्झरा हनुमान मंदिर के नाम से भी जाना जाता है.

Speciality of dhanushdhari hanuman mandir


इस मंदिर में जो हनुमान जी की मूर्ति है, वह हनुमानजी के अन्य मंदिरों से काफी अलग है. इस मूर्ति की खासियत यह है कि इस मूर्ति ने अपने कंधे पर एक धनुष धारण कर रखा है. सामान्यतः हनुमानजी का यह रूप किसी भी मंदिर में देखने को नहीं मिलता है.

मंदिर के सामने एक ऊँचे चबूतरे पर चरण पादुकाएँ बनी हुई हैं. जिस प्रकार हनुमानजी के अधिकांश पहाड़ी मंदिरों में बन्दर मौजूद होते हैं ठीक उसी प्रकार इस स्थान पर भी बहुतायत में बन्दर मौजूद हैं.


बारिश के मौसम में यह स्थान अत्यंत मनोरम हो जाता है. जब हम मंदिर के पास में स्थित रेत के टीलों पर चढ़कर चारों तरफ नजर दौड़ाते हैं तो इस स्थान की प्राकृतिक सुन्दरता का वास्तविक आभास होता है.

वैसे तो मंदिर में हमेशा ही श्रद्धालुओं की आवाजाही रहती है परन्तु मंगलवार को यहाँ काफी चहल पहल रहती है. मंदिर में धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ सवामनी प्रसादी बनाने की पूरी व्यवस्था है.

मंदिर की देखरेख एवं विकास कार्यों के लिए मंदिर विकास समिति की बैठक प्रत्येक माह के अंतिम शनिवार को होती है. अगर आप धार्मिक व्यक्ति होने के साथ-साथ एक पर्यटक भी हैं तो आपको इस स्थान की यात्रा निसंदेह करनी चाहिए.

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Ramesh Sharma
M Pharm, MSc (Computer Science), MA (History), PGDCA, CHMS

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