Kya Aankhen Sachmuch Dil Ki Juban Hoti Hai?

Kya Aankhen Sachmuch Dil Ki Juban Hoti Hai?


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kya aankhen sachmuch dil ki juban hoti hai

क्या आँखे सचमुच दिल की जुबान होती है?


आँखे ईश्वर की बनाई हुई वो रचना है जिसके द्वारा हर जीव जंतु इस खूबसूरत दुनिया के दर्शन करता है। शरीर आँखों का एक महत्वपूर्ण अंग है तथा बिना आँखों के जिन्दगी में अँधेरा छा जाता है।

आँखें नहीं होने पर जीवन में हर तरफ घने काले भयाक्रांत कर देने वाले अन्धकार के अलावा कुछ नहीं रहता है। शारीरिक सुन्दरता में भी आँखों का सबसे महत्वपूर्ण स्थान है तथा बिना आँखों के शारीरिक सुन्दरता की कल्पना भी नहीं की जा सकती है।

आँखों की कोई जुबान नहीं होती है परन्तु आँखे बिना जुबान के ही बहुत कुछ कह देती है। आँखों के इशारे, बिना कुछ बोले ही सब कुछ समझा देते है। जब कोई बात मुँह से नहीं करनी हो तो आँखों से बड़ी आसानी से की जा सकती है।

कहते है कि आँखे दिल का आईना होती है तथा इस आईने को देखकर दिल का हाल बड़ी आसानी से मालूम किया जा सकता है। किसी की आँखों में देखकर उसके दिल में क्या चल रहा है इसका अंदाजा बखूबी लगाया जा सकता है।

Do the eyes really tell about our heart?


वैसे तो आँखों की बोली और भाषा का महत्व हर उम्र में होता है परन्तु युवावस्था में यह अनूठी भूमिका निभाती है। जब दिल पर रूमानियत का कुछ ज्यादा असर होने लगता है, जब जुबान से लब्ज नहीं निकलते है, तब आँखे अपनी भूमिका का उचित निर्वाह करती है।

एक रूमानी दिल दूसरे रूमानी दिल की भावनाओं को बिना कुछ कहे सुने आँखों के जरिये बड़ी आसानी से समझ लेता है।

आँखों की बोली भी अनोखी और मधुर होती है तथा इसके लिए किसी भी तरह के बाहरी प्रशिक्षण की आवश्यकता नहीं पड़ती है बल्कि इंसान का दिल ही एक प्रशिक्षक की भूमिका निभाता है।


जैसे-जैसे दिल जवान होता है आँखों की बोली और उनकी भाषा अपने आप समझ में आने लगती है। आँखों की तारीफ विभिन्न रूप में की जाती है जैसे झील सी नीली आँखे, कजरारी आँखे, समुन्दर सी गहरी आँखे, मृगनयनी, आदि।

हर प्रकार की आँखों का अपना एक अलग महत्त्व होता है। प्रेम में डूबे हुए दिल आँखों की बोली का बहुत अधिक इस्तेमाल करते हैं और बिना एक शब्द बोले सुने सब कुछ समझ लेते हैं।

सदियों से आँखों की तारीफ में बहुत से शेर, शायरियाँ, गजल, कविताएँ, गीत, आदि कहे सुने गए है। श्रृंगार रस की कविताओं का एक बहुत बड़ा विषय आँखे ही रहा है।

फिल्मों में भी आँखों के सौन्दर्य को प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया है तथा इन पर बहुत अधिक गाने भी लिखे और गाये गए हैं। एक प्रेमी की नजर से देखने पर पता चलता है कि आँखों के ऊपर उठनें और नीचे झुकनें पर क्या महसूस होता है।

आँखों के उठनें पर जैसे सुबह होती है और चहुँ ओर उजियारा छा जाता है उसी प्रकार आँखों के झुकनें पर वो उजियारा अँधेरे द्वारा ढक लिया जाता है और चहुँ ओर अन्धकार छा जाता है।

आँखों की भाषा सिर्फ और सिर्फ आँखों से समझी जा सकती है तथा ये दिल के उद्गार होते हैं जिनको शब्दों में ढालना बहुत मुश्किल होता है।

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Ramesh Sharma
M Pharm, MSc (Computer Science), MA (History), PGDCA, CHMS

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