Kya Hum Really Independent Ho Gaye Hain?

Kya Hum Really Independent Ho Gaye Hain?


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kya hum really independent ho gaye hain

क्या हम रियली इंडिपेंडेंट हो गए हैं?


हम हर वर्ष आजादी का पर्व मनाते हैं परन्तु हमने कभी सोचा है कि क्या जिस आजादी का सपना हमारे आजादी के दीवानों ने देखा था वो आजादी हमने हासिल कर ली है?

हमारे महान क्रांतिकारियों, स्वतंत्रता सेनानियों, संविधान निर्माताओ ने तथा जिन्होंने भी आजादी के लिए प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से अपने तन, मन और धन से बलिदान दिया, क्या उन्होंने हमारे आज के देश की कल्पना की होगी? क्या हमें लगता है कि हमने सचमुच आजादी प्राप्त कर ली है?

हम लोग अंग्रेजी शासन से तो 1947 में ही आजादी प्राप्त कर चुके हैं लेकिन आज भी उन सामाजिक कुरीतियों, धार्मिक अंधविश्वासों, बाल मजदूरी, नारी उत्पीड़न, गरीबी और बेकारी, भुखमरी जैसी कई समस्याओं से आजादी हासिल नहीं कर पाए हैं।

15 अगस्त और 26 जनवरी तथा इनके एक दो दिन आगे पीछे हमारी देशभक्ति चरम सीमा पर होती है जिसका प्रदर्शन सार्वजनिक रूप से सामाजिक मंचो पर किया जाता है।

सामाजिक माध्यमो जैसे फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सएप पर देशभक्ति के संदेशो, तिरंगे में लिपटी हुई तस्वीरों, देशभक्ति से सराबोर धुनों तथा गानों की बाढ़ सी आ जाती है तथा जितनी तीव्रता से ये बाढ़ आती है उससे कही अधिक तीव्रता से ये गायब भी हो जाती है। सभी लोगों में देशभक्त बनने और उसे प्रकट करने की होड़ सी लग जाती है।

Have we become really independent?


सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और सरकारी दफ्तरों में अवकाश घोषित होता है जिसको अघोषित पर्यटन दिवस के रूप में बिताया जाता है। पिकनिक मनाई जाती है, पिक्चर हॉल में फिल्मे देखी जाती हैं और पूरे दिन का रविवार की तरह पूर्ण आनंद लिया जाता है।

जिन दफ्तरों में अवकाश नहीं होता है वहाँ के कर्मचारी अपने आप को ठगा हुआ सा महसूस करते हैं और उन कर्मचारियों को खुशकिस्मत समझते हैं जिनके यहाँ अवकाश घोषित हुआ होता है। कुछ लोग तो इसे सरकारी नौकरी के फायदों में भी गिनाने लग जाते हैं।

हमें इस मानसिकता को बदलना होगा तथा समझना होगा कि ये कोई छुट्टी का दिन नहीं है। ये वो दिन है जब हम वो कार्य कर सकते हैं जो अधूरे छूटे हुए हैं।


इस दिन हम सामाजिक कुरीतियों, धार्मिक अंधविश्वासों, बाल मजदूरी, नारी उत्पीड़न, गरीबी, बेकारी, भुखमरी जैसी कई समस्यायों से छुटकारा पाने का संकल्प ले सकते हैं और उस दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

बाल मजदूरी, भुखमरी, गरीबी, बेकारी, शोषण, दहेज प्रथा तथा नारी उत्पीड़न, आदि समस्याओं से हमें अपने देश को आजादी दिलानी है जिसके लिए हमें पूर्ण संकल्प और ईमानदारी के साथ प्रयास करने होंगे।

जब तक हम उपरोक्त समस्याओं से मुक्त नहीं हो जाते तब तक सही मायनों में हम आजाद नहीं हो सकते हैं। अतः हमें देशभक्ति का जज्बा रखकर पूर्ण ईमानदारी के साथ इस नयी आजादी की लड़ाई में अपना योगदान देना चाहिए।

इस लेख का मतलब किसी की देशभक्ति पर प्रश्नचिंह लगाना नहीं है अपितु देशवासियों को इन बुराइयों और कुरीतियों के प्रति आगाह करना हैं ताकि प्रत्येक देशवासी अपने स्तर पर इन समस्याओं से लड़ कर उनके उन्मूलन में अपना योगदान दे सके।

About Author

Ramesh Sharma
M Pharm, MSc (Computer Science), MA (History), PGDCA, CHMS

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