Life Ko Satisfied Life Me Kaise Change Karen?

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जीवन को संतुष्ट जीवन में कैसे बदलें?


हम सभी अपनी जिन्दगी जी रहे हैं या फिर यूँ कहें कि गुजार रहे हैं या फिर जिएँ जा रहे हैं. क्या हमने कभी सोचा है कि हम जो जीवन जी रहे हैं उसे जीने का भी कोई तरीका हो सकता है?

हम जो जीवन जी रहे हैं क्या हम उससे खुश हैं? हम अपनी जिन्दगी को पूर्ण संतुष्टि के साथ कैसे जी सकते हैं?

हम में से अधिकांश लोगों ने इस विषय पर शायद ही कभी विचार किया हो क्योकि इस भागदौड़ भरी जिन्दगी में हमारे पास अपनी जिन्दगी, अपने जीवन के बारे में सोचने का वक्त ही नहीं है.

जब किसी इन्सान के पास खुद के लिए भी वक्त नहीं रहता है तब उससे ज्यादा गरीब इस धरती पर कोई नहीं होता है फिर चाहे वो आर्थिक रूप से कितना भी सशक्त क्यों न हो. अर्थ यानि पैसा कभी भी आत्मिक सुख प्रदान नहीं कर सकता.

आत्मिक सुख प्राप्त करने के लिए इन्सान के पास इतना वक्त तो होना ही चाहिए कि वो रोज अपना आत्म निरीक्षण कर सके तथा अपने तथा अपने परिवार के बारे में सोच सकें.

जीवन के बारे में अधिकांश लोगों के विचार यही होते हैं कि जैसा जीवन चल रहा है वह भगवान की इच्छा है, यह हमारे कर्मो का फल है या फिर हम कर ही क्या सकते हैं.

हम सब कुछ भगवान पर छोड़ कर निश्चित कर लेना चाहते हैं कि हम जिन परिस्थितियों में जी रहे हैं वो सही है तथा यही भगवान की मर्जी है, इसके लिए हम जिम्मेदार नहीं है.

How can we change our life in satisfied life?


हम अपनी परिस्थितियों से लड़कर उन्हें बदलना नहीं चाहते बल्कि उन्हें टालकर भाग जाना चाहते हैं. हमें अपनी परिस्थितियों से भागना नहीं चाहिए बल्कि उन्हें बदलने का प्रयास करना चाहिए.

सबसे पहले हमें अपने आसपास का वातावरण खुशहाल बनाने का प्रयास करना चाहिए क्योकि अनुकूल परिस्थितियाँ ही मन को सुखी और आनन्दित कर सकती है.


हमारा प्रत्येक दिन इतना मनोरंजक एवं सुखद हो कि हमें दिन के चौबीस घंटे कम लगने चाहिए तथा हम दिन के प्रत्येक पल को जीना चाहें. हमें आने वाले दिन का गहरे उत्साह के साथ इन्तजार रहे.

ये परिस्थितियाँ तब बनती है जब हम अपने जीवन से संतुष्ट हों तथा हम में हर हाल में खुश रहने की प्रवृति हो. आत्मिक संतुष्टि का धन से कोई सम्बन्ध नहीं होता क्योकि अगर ऐसा होता तो हर धनवान व्यक्ति खुश होता.

आत्मिक खुशी तब पैदा होती है जब इंसान के मन पर किसी तरह का कोई बोझ नहीं होता.

Way to get satisfied life


जब हर इंसान के प्रति सम्मान तथा आदर के भाव मन में हो, जब कभी किसी का अहित करने का मन में ख्याल भी नहीं आए, जब इंसान अपने तथा परायों द्वारा खुद तथा अपने परिवार का अहित नहीं होने दे, जब इंसान सामाजिक तथा आध्यात्मिक ढकोसलों से दूर रहे तथा आखिरी और सबसे अधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि जब इंसान हर हाल में अपनी इच्छाएँ सन्यासी की तरह सीमित रखकर जीना सीख जाता है तब उस इंसान से ज्यादा सुखी और संतुष्ट कोई नहीं हो सकता.

About Author

Ramesh Sharma
M Pharm, MSc (Computer Science), MA (History), PGDCA, CHMS

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