Sports Me Politics Ka Interference Kyon Badhta Ja Raha Hai?

Sports Me Politics Ka Interference Kyon Badhta Ja Raha Hai?


sports me politics ka interference kyon badhta ja raha hai, why is increasing interference of politics in sports, politics in sports, sports and politics

sports me politics ka interference kyon badhta ja raha hai

खेलकूद में राजनीति का दखल क्यों बढ़ता जा रहा है?


आज का युग, सूचना प्रौधोगिकी का युग हैं जिसमे खेलकूद का एक प्रमुख स्थान हैं। खेलकूद खिलाड़ियों के साथ साथ इससे जुड़े दूसरे कई लोगों के लिए दुधारू गाय बन गया हैं।

खेलकूद काफी हद तक एक व्यापार बन चुका हैं जिसमें इससे जुड़े अधिकतर व्यक्तियों का उद्धेश्य सिर्फ धन और नाम कमाना हैं।

खिलाड़ी ज्यादातर आयोजकों और स्पोंसरों के हाथों की कठपुतली बन जाते हैं तथा उन्हें धन कमानें का साधन बना दिया जाता हैं। करोड़ो की आबादी में कितने खिलाड़ी योग्य होनें के पश्चात भी अपना स्थान बना पाते हैं?

आज के इस युग में प्रतिभा के साथ साथ सिफारिश की भी बहुत जरूरत पड़ जाती हैं तथा अधिकतर सिफारिशी खिलाड़ी प्रतिभाशाली खिलाडियों पर भारी पड़ जाते हैं। खेलों में हर स्तर पर जुगाड़ की आवश्यकता पड़नें लग गई है।

Why is increasing interference of politics in sports?


खेलकूद पूरी तरह से राजनीति की गिरफ्त में हो गए है जिसके नीति निर्धारक वे लोग बन गए हैं जिनका खेलकूद से दूर दूर तक का भी नाता नहीं हैं।

अधिकतर खेल संघों के प्रमुख पदों पर राजनीतिक दलों से जुड़े हुए लोगों तथा धनाढ्य वर्ग नें कब्जा जमा रखा हैं तथा ये लोग वर्षो से जोंक की तरह चिपके हुए हैं।

खेल संघो तथा खेलों से जुड़ें अन्य प्रशासनिक पदों पर खिलाडियों का स्थान नगण्य हैं तथा अगर कहीं कोई खिलाड़ी इनपर हैं भी तो वह राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है और एक नुमाइंदे मात्र की भूमिका अदा करता हैं।

ऐसा नही हैं की काजल की इस कोठरी में हर कोई काला ही होता है परन्तु जो इस परिपाटी को तोड़ने का प्रयत्न करता है तो उस पर अनर्गल आरोप लगाकर हटा दिया जाता हैं और अपनी कठपुतली को बागडोर सोंप दी जाती हैं।

जिस भी राजनीतिक दल की सत्ता आती है वो पुराने पदाधिकारियों को कार्यमुक्त कर अपनें कारिंदों को इन पदों पर आसीन करनें में लग जाता हैं।

खेलकूद का पूरी तरह व्यावसायीकरण कर दिया गया हैं जहाँ धन का अर्जन ही लक्ष्य बन चुका हैं। बड़े बड़े औधोगिक घरानों का ध्यान भी इस नए व्यापार की तरफ आकृष्ट हुआ हैं और यहाँ धन कमानें की प्रबल संभावनाएं नजर आने लगी हैं।


उन्हें मनोरंजन के साथ साथ धन कमानें का स्वर्णिम अवसर मिल गया हैं। ये औधोगिक घराने राजनीतिक रूप से इतनें सक्षम होते है कि खेल नीतियों में इनके फायदेनुसार परिवर्तन कर दिए जाते हैं।

औधोगिक घरानों के लिए खिलाड़ी तथा टीम दोनों की बोली लगाई जा रही हैं जैसे प्राचीन समय में गुलामों की लगाई जाती थी। खेल और खिलाड़ी दोनों शतरंज के मोहरे बन चुके हैं जिनकी दिशा और दशा राजनितिक और आर्थिक आका तय करते हैं।

खेलों को वर्तमान अवस्था से निकालनें के लिए इनके नीतिनिर्धारक सिर्फ और सिर्फ खिलाड़ी ही होने चाहिए। भूतपूर्व खिलाड़ी जिनके नाम सबको स्वीकार्य हो, वो खेल संघो तथा प्रशासनिक पदों पर पूर्ण स्वायत्ता के साथ आसीन होकर खेलकूद को इस दलदल से निकालें।

सबसे प्रमुख बात यह हैं कि राजनीतिक दलों तथा उनसे जुड़े लोगों को खेलों से सम्बंधित निर्णय लेने का पूर्ण अधिकार नहीं होना चाहिए। खेलों में राजनेताओं तथा उद्योगपतियों का दखल नहीं होना चाहिए।

खेलों को राजनीति से दूर होना चाहिए अन्यथा इनका विकास और सही योग्यताओं का चयन बहुत मुश्किल हैं। आजकल राजनीति सिर्फ और सिर्फ सत्ता और सर्वोच्चता के लिए की जाती है।

About Author

Ramesh Sharma
M Pharm, MSc (Computer Science), MA (History), PGDCA, CHMS

Connect with us

Follow Us on Twitter
Follow Us on Facebook
Subscribe Our YouTube Travel Channel
Subscribe Our YouTube Healthcare Channel

Disclaimer

इस लेख में दी गई जानकारी विभिन्न ऑनलाइन एवं ऑफलाइन स्त्रोतों से ली गई है जिनकी सटीकता एवं विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है. हमारा उद्देश्य आप तक सूचना पहुँचाना है अतः पाठक इसे महज सूचना के तहत ही लें. इसके अतिरिक्त इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी.

अगर आलेख में किसी भी तरह की स्वास्थ्य सम्बन्धी सलाह दी गई है तो वह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर लें.

आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं एवं कोई भी सूचना, तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार N24.in के नहीं हैं. आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति N24.in उत्तरदायी नहीं है.

0 Comments