Website Me Domain Name Ka Kya Use Hai?

Website Me Domain Name Ka Kya Use Hai?


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वेबसाइट में डोमेन नेम का क्या उपयोग होता है?


आधुनिक युग पूर्णतया सूचना प्रौद्योगिकी का युग है जिसमे कंप्यूटर और इन्टरनेट से सम्बंधित ज्ञान अति आवश्यक है।

जिस प्रकार अंग्रेजी भाषा के ज्ञान में कमी को अज्ञानता से जोड़ दिया जाता है ठीक उसी प्रकार सूचना प्रौद्योगिकी में अज्ञान को भी अनपढ़ता से जोड़ा जाता है।

कहने का मतलब यह है कि आधुनिक युग में अंग्रेजी, कंप्यूटर और इन्टरनेट का ज्ञान अति आवश्यक है तथा जिसे इनका भली भाँती ज्ञान नहीं है वह पढ़ा लिखा अनपढ़ है।

जब से स्मार्टफोन का चलन आम हुआ है तब से हर आदमी इन्टरनेट की पँहुच में आ गया है। इस इन्टरनेट की बढती हुई पहुँच तथा लोकप्रियता ने सभी को अपनी तरफ आकर्षित किया है।

व्यापारी, शैक्षिक संस्थान तथा शिक्षा से जुड़े संगठन, ई कॉमर्स सम्बन्धी प्रतिष्ठान आदि सभी अपने कार्यक्षेत्र की पहुँच को वैश्विक स्तर पर पहुँचाने के लिए प्रयासरत है।

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इन सभी के प्रयास को अमलीजामा पहनानें के लिए वेबसाइट की जरुरत होती है। जब हमें वेबसाइट की जरुरत होती है तब हमें इससे सम्बंधित कई मूलभूत बातों की जानकारी होना आवश्यक होती है।

वेबसाइट वह माध्यम है जिसकी सहायता से कोई भी अपने आप को या अपने संगठन को वैश्विक पहचान दे सकता है। वेबसाइट की पँहुच दुनिया के कोने-कोने तक होती है।

वेबसाइट के लिए हमें डोमेन नेम (Domain Name), वेब होस्टिंग (Web Hosting), ई-मेल (Email), वेब डिजाइनिंग (Web Designing) आदि बातों का पता होना जरुरी है।

वेबसाइट के तीन प्रमुख हिस्से होते हैं जिनमे पहला वेबसाइट का नाम, दूसरा उसका एक्सटेंशन तथा तीसरा हिस्सा सब डोमेन या सी नेम होता है।

उदाहरण के लिए जैसे कोई वेबसाइट www.yourname.com है तो इसका पहला हिस्सा yourname है जिसे हम वेबसाइट का नाम कहते हैं तथा यह उपलब्ध नामों में से कुछ भी रखा जा सकता है।

दूसरा हिस्सा .COM है जिसे एक्सटेंशन कहते हैं तथा यह कई प्रकार का होता है जैसे .NET, .INFO, .ORG, .CO, .ASIA, .EDU आदि। अभी तक विश्व में सबसे प्रचलित एक्सटेंशन .COM है।

वेबसाइट का तीसरा हिस्सा सब डोमेन या फिर सी नेम होता है जिसे www (World Wide Web) कहते हैं तथा यह वेबसाइट के शुरू में आता है। अतः पहला हिस्सा मध्य में, दूसरा हिस्सा अंत में तथा तीसरा हिस्सा शुरुआत में होता है।

सब डोमेन या फिर सी नेम एक ही वेबसाइट पर अलग-अलग वेबसाइट चलाने के लिए काम आता है। www भी एक सब डोमेन ही है तथा यह हर डोमेन के साथ शुरुआत से ही मिलता है। हम किसी भी नाम को सब डोमेन के रूप में हमारी प्रमुख वेबसाइट पर चला सकते हैं।

उपरोक्त उदहारण में www एक सब डोमेन है परन्तु हम इसकी जगह कोई दूसरे नाम को भी रख सकते हैं जैसे उदहारण के लिए हमने सब डोमेन के लिए money नाम रखा तो अब हमारी वेबसाइट का नया नाम money.yourname.com हो जायेगा।

जब हम कोई वेबसाइट शुरू करना चाहते हैं तो सबसे पहले उस वेबसाइट के लिए नाम की आवश्यकता होती है। वेबसाइट के लिए लिया जाने वाला यह नाम अद्वितीय (Unique) होना चाहिए अर्थात उस जैसा नाम संसार में दूसरा नहीं होना चाहिए।

वेबसाइट के लिए लिए जाने वाले इस नाम को डोमेन का नाम (Domain Name) कहते हैं तथा यह वेबसाइट का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।


बहुत बार जब हमें अपना मनपसंद डोमेन तथा एक्सटेंशन नहीं मिलता है तब हमें उस डोमेन को प्राप्त करने के लिए एक्सटेंशन बदलना पड़ता है। एक्सटेंशन का विकास इसी समस्या को सुलझाने के लिए ही हुआ है।

डोमेन नेम खरीद लेने के पश्चात हमें अपने अकाउंट को लॉग इन करना पड़ता है तथा उसमे खरीदे हुए डोमेन के सामने दिए गए मैनेज बटन पर क्लिक करके उसे खोलना पड़ेगा या फिर अगर सीधे ही मैनेज डीएनएस (DNS) का बटन दिया है तो उसे क्लिक करके खोलना पड़ेगा। नया पेज खुलने पर हमें उसमे डीएनएस फाइल जोन को मैनेज करना पड़ता है।

जब हम डीएनएस फाइल जोन को खोलते हैं तो हमें कई प्रकार के रिकार्ड्स प्राप्त होते हैं जिनमे प्रमुख है ए रिकार्ड्स (A Records), सी नेम (C Name), मेल एक्सचेंजर (MX Records), नेम सर्वर (Name Servers) आदि। वेबसाइट को किसी होस्टिंग पर चलाने के लिए ए रिकार्ड्स काम आता है।

किसी भी अच्छी साख वाली वेबसाइट से जब हम डोमेन खरीदते हैं तो हमें ए रिकॉर्ड में पहले से ही एक अस्थाई आईपी (IP) मिलती है अर्थात इस अस्थाई आईपी पर यह डोमेन चल रहा होता है।

जब हम वेब होस्टिंग ले लेते हैं अर्थात वेबसाइट के लिए स्थायी आईपी ले लेते हैं तो हमें ए रिकार्ड्स में इस अस्थाई आईपी को बदलकर उसकी जगह स्थाई आईपी को लिखना होता है तभी उस होस्टिंग पर वेबसाइट चलती है।

जितने भी सब डोमेन हमें अपनी वेबसाइट पर चलाने होते हैं उनके लिए हमें उन सभी सब डोमेनों को सी नेम में ऐड करना पड़ेगा।

ईमेल के आदान प्रदान के लिए भी सी नेम में पीओपी (POP – Post Office Protocol), एसएमटीपी (SMTP - Simple Mail Transfer Protocol), आईएमएपी (IMAP - Internet Message Access Protocol) आदि सब डोमेन पहले से ही जुड़े रहते हैं या फिर मैन्युअली जोड़े जाते हैं।

इन सभी का मुख्य काम विभिन्न डिवाइसेस में वेबसाइट के ईमेल को कॉन्फ़िगर करने के लिए सेटिंग्स प्रदान करने का होता है ताकि इन सेटिंग्स की मदद से वेबसाइट के ईमेल उस डिवाइस पर चल सके।

मेल एक्सचेंजर एक माध्यम के रूप में काम करता है तथा यह वेबसाइट के ईमेल से उपयोगकर्ता के ईमेल पर तथा उपयोगकर्ता के ईमेल से वेबसाइट के ईमेल पर ईमेल का आदान प्रदान करता है।

जब हम वेब होस्टिंग ले लेते हैं तब यह सी पैनल से शुरू किया जा सकता है परन्तु इसका स्पेस बहुत कम होता है। अधिक स्पेस के लिए हमें बिजनस ईमेल या कॉर्पोरेट ईमेल लेना पड़ता है।

नेम सर्वर पहले से ही कॉन्फ़िगर किये हुए होते हैं तथा साधारणतया इन्हें कॉन्फ़िगर करने की जरुरत नहीं होती है। अतः हमें जब भी अपनी वेबसाइट शुरू करनी हो तब हमें इन कुछ प्रमुख बातों की जानकारी होना अति आवश्यक है ताकि हम अपनी वेबसाइट को बेहतर तरीके से संचालित कर पाएँ।

About Author

Ramesh Sharma
M Pharm, MSc (Computer Science), MA (History), PGDCA, CHMS

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