Phoolon Ko Mahak Di Kudarat Ne Poem

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Phoolon Ko Mahak Di Kudarat Ne Poem in Hindi
फूलों को महक दी कुदरत ने कविता


फूलों को महक दी कुदरत ने
काँटों को हमें महकाना है
जो काम किसी से हो ना सका
वो काम हमें कर जाना है।

सूरज से उजाला क्यों मांगे
चाँद सितारों से क्यों उलझे
जीवन की अँधेरी रातों में
अब खुद को हमें चमकाना है।

दौलत के नशे में चूर हो क्यों
ताकत पे बेहद मगरूर हो क्यों
दुनिया है तमाशा दो दिन का
सब छोड़ यहीं पर जाना है।


लब्जों की भी कीमत होती है
लब्जों का तुम सम्मान करो
शायद वो हकीकत बन जाए
जो लब्ज अभी अफसाना है।

ऐ दोस्त बहारों का मौसम
हर वक्त नहीं रहने वाला
जो आज खिला है गुलशन में
उस फूल को कल मुरझाना है।

By Kundan Chauhan

Phoolon Ko Mahak Di Kudarat Ne Poem in English


About Author

Ramesh Sharma
M Pharm, MSc (Computer Science), MA (History), PGDCA, CHMS

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