Website Ke Liye Web Hosting Ki Kya Importance Hai?

Website Ke Liye Web Hosting Ki Kya Importance Hai?


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वेबसाइट के लिए वेब होस्टिंग की क्या इम्पोर्टेंस  है?


किसी भी वेबसाइट के लिए अत्यावश्यक चीजों में वेब होस्टिंग (Web Hosting) शामिल होती है। जैसे हमने पिछले आर्टिकल में डोमेन नेम (Domain Name) के बारे में बताया था कि यह एक वेबसाइट के लिए किस प्रकार महत्वपूर्ण होता है उसी प्रकार इस आर्टिकल में हम वेबसाइट के लिए वेब होस्टिंग की महत्ता तथा उसके बारे में जानेंगे।

वेबसाइट के लिए एक नाम की जरूरत होती है उसे हम कोई भी डोमेन लेकर पूरी कर लेते हैं परन्तु डोमेन लेने के पश्चात हमें उस वेबसाइट को इन्टरनेट पर प्रदर्शित करने के लिए वेब होस्टिंग की आवश्यकता होती है।

जिस प्रकार किसी भी नाम के व्यक्ति का पता उसका घर होता है ठीक उसी प्रकार किसी भी डोमेन के लिए भी एक विशिष्ट घर होता है जो उसका पता होता है जिसे हम वेब एड्रेस (Web Address) कहते हैं।

जब हम किसी भी वेब ब्राउजर के यूआरएल (URL - Uniform Resource Locator) बार में कोई डोमेन नेम टाइप करते हैं तो वह वेबसाइट हमें तब दिखेगी जब वह डोमेन किसी होस्टिंग पर होस्ट किया हुआ हो अन्यथा वह वेबसाइट नहीं खुलेगी।

इस प्रकार हम कह सकते है कि कोई भी वेबसाइट इन्टरनेट पर लाइव (Live) तब होगी जब वो होस्ट होगी अन्यथा वह लाइव नहीं होगी। अतः हमें वेब होस्टिंग का ज्ञान होना बहुत जरूरी है।

What is the difference between static and dynamic website?


वेबसाइट दो तरह की होती है जिसमे पहली बिना डेटाबेस के होती है तथा दूसरी डेटाबेस के साथ होती है। बिना डेटाबेस की वेबसाइट को सामान्यता स्टेटिक वेबसाइट कहते हैं अर्थात इसमें वेबसाइट के कंटेंट्स को बदलने के लिए कोई बेकएंड एडमिन पैनल नहीं होता है।

डेटाबेस वाली वेबसाइट सामान्यतया डायनामिक वेबसाइट होती है जिसमे सभी कंटेंट्स तथा डेटाबेस को बदलने के लिए एक बेकएंड एडमिन पैनल होता है।

इस प्रकार हम कह सकते हैं कि जब हम कोई होस्टिंग लेते हैं तो वह वेबसाइट कंटेंट्स तथा डेटाबेस दोनों को अलग-अलग मेन्टेन करती है अर्थात डेटाबेस भी एक सर्वर से मेन्टेन होता है।

What is web hosting?


वेब होस्टिंग को सामान्यता होस्टिंग (Hosting) या वेब स्पेस (Web Space) भी कहते हैं। होस्टिंग में दो प्रकार के प्लेटफार्म होते हैं जिनमे से किसी एक को चुनना पड़ता है जिनमे पहला लाइनेक्स (LINUX) तथा दूसरा विंडोज (WINDOWS)।

अधिकतर वेबसाइट्स लाइनेक्स प्लेटफार्म पर ही चलती है तथा यह मुख्यतया पीएचपी (PHP - Personal Home Page) लैंग्वेज के लिए होता है जिसमे डेटाबेस के लिए माय एसक्यूएल (SQL – Structured Query Language) काम में लेना पड़ता है जो कि मुफ्त होता है।

दरअसल पीएचपी तथा माय एसक्यूएल दोनों ओपन सौर्स (Open Source) होते हैं जो कि मुफ्त उपलब्ध होते हैं। इसमें एडमिन पैनल का नाम सी (C – Panel) पैनल होता है।

दूसरा प्लेटफार्म विंडोज होता है जो मुख्यतया डॉट नेट (.NET – Network Enabled Technology) लैंग्वेज के लिए होता है अर्थात जब हम वेबसाइट के लिए एएसपी डॉट नेट (ASP.NET – Active Server Pages.NET) काम में लेते हैं तब हमें इस प्लेटफार्म की जरूरत होती है।

इसमें डेटाबेस (Database) के लिए एमएस एसक्यूएल (MS SQL – Microsoft Structured Query Language) काम में लेना पड़ता है जो कि मुफ्त नहीं होकर पैसे में खरीदनी पड़ती है। इसमें एडमिन पैनल (Admin Panel) का नाम पैरेलल्स प्लेस्क (Parallels Plesk) होता है।

वेब होस्टिंग मुख्यतया तीन तरह की होती है जो निम्न प्रकार है:

1 शेयर्ड होस्टिंग (Shared Hosting)
2 वीपीएस होस्टिंग (VPS Hosting – Virtual Private Server Hosting)
3 डेडिकेटेड सर्वर होस्टिंग (Dedicated Server Hosting)

सबसे पहले हम शेयर्ड होस्टिंग के बारे में बात करेंगे। शेयर्ड होस्टिंग वह होस्टिंग होती है जिसमे एक ही सर्वर पर बहुत सी वेबसाइट को होस्ट किया जाता है अर्थात सर्वर की हार्ड डिस्क पर बहुत सी वेबसाइट होस्ट रहती हैं और हर वेबसाइट द्वारा सर्वर को शेयर कर लिया जाता है।

इस होस्टिंग में हर वेबसाइट की होस्टिंग के लिए एक ही आईपी (IP) काम आता है अर्थात शेयर्ड होस्टिंग में होस्टेड सभी वेबसाइट्स का आईपी समान होता है।

यह होस्टिंग ऐसी वेबसाइट्स के लिए उपयुक्त होती है जिनके लिए डिस्क स्टोरेज (Disk Storage) तथा बैंडविथ (Bandwidth) की अधिक आवश्यकता नहीं होती है अर्थात इन वेबसाइट्स को देखने के लिए एक समय में ज्यादा विजिटर्स नहीं आते मतलब की वेबसाइट पर ट्रैफिक कम होता है।

अगर हमारी वेबसाइट पर ज्यादा लोग विजिट करने लग जाते हैं तथा हमारी वेबसाइट का कंटेंट हमें बढ़ाना होता है तब हमें अधिक डिस्क स्टोरेज तथा बैंडविथ की आवश्यकता पड़ती है। इस प्रकार की परिस्थिति में अगर हमने होस्टिंग नहीं बदली तो हमारी वेबसाइट सुचारू रूप से नहीं चल पायेगी।

इस प्रकार की स्थिति में हम वेबसाइट को शेयर्ड होस्टिंग पर नहीं चला सकते हैं तथा अब हमें कम से कम वीपीएस होस्टिंग की जरुरत पड़ती है। वीपीएस होस्टिंग में स्पेस तथा बैंडविथ शेयर्ड होस्टिंग के मुकाबले बहुत ज्यादा होता है।


वीपीएस होस्टिंग का मतलब वर्चुअल प्राइवेट सर्वर होस्टिंग होता है। इस होस्टिंग में एक सर्वर पर हर होस्टिंग अकाउंट के लिए अलग हार्डडिस्क लगाकर स्पेस उपलब्ध करवाया जाता है तथा हर होस्टिंग अकाउंट की आईपी अद्वितीय (Unique) होती है।

अतः सभी होस्टिंग अकाउंट की अपनी एक अलग आईपी होती है जो दूसरे सभी अकाउंट से अलग होती है। अब अगर एक वीपीएस होस्टिंग पर केवल एक ही वेबसाइट चल रही है तो उसकी आईपी अद्वितीय होगी परन्तु अगर एक वीपीएस होस्टिंग पर बहुत सी वेबसाइट चल रही होगी तो इन सभी का आईपी एक ही होगा।

जब हमारा काम वीपीएस होस्टिंग से भी नहीं चलता है अर्थात जब हमारी वेबसाइट पर कंटेंट तथा ट्रैफिक बहुत ज्यादा हो जाता है तब हमें डेडिकेटेड सर्वर होस्टिंग लेनी पड़ती है।

इस होस्टिंग में स्पेस तथा बैंडविथ, वीपीएस होस्टिंग के मुकाबले बहुत ज्यादा होता है। डेडिकेटेड सर्वर होस्टिंग में होस्टिंग प्रोवाइडर हर होस्टिंग अकाउंट के लिए अलग सर्वर उपलब्ध करवाता है अर्थात हर अकाउंट के लिए एक अलग सर्वर होता है।

अतः किसी भी वेबसाइट को होस्ट करने से पहले हमें उपरोक्त मूलभूत बातों का ज्ञान होना बहुत आवश्यक है ताकि हम कम से कम अपनी वेबसाइट के तो लिए सही निर्णय ले सके।

About Author

Ramesh Sharma
M Pharm, MSc (Computer Science), MA (History), PGDCA, CHMS

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