Happiness Ke Liye Life Me Kya Change Karen?

Happiness Ke Liye Life Me Kya Change Karen?


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happiness ke liye life me kya change karen

खुश रहने के लिए जीवन में क्या बदलाव करें?


सफलता हर मनुष्य का चरम लक्ष्य है तथा सफलता को प्राप्त करने के लिए वह अपना सब कुछ दाव पर लगा देता है. मनुष्य अपनी इच्छित सफलताओं को साकार करने के लिए अपने दिन का चैन तथा रातों की नींद भी खों बैठता है.

पूरी उम्र वह इसी उहापोह में ही गुजार देता है जिसकी वजह से वह अपने तथा अपने परिवार के लिए भी वक्त नहीं निकाल पाता है.

कुछ लोगों को उम्र ढलने पर तथा कुछ को उम्र ढल जाने पर यह अहसास होता है कि उन्होंने जीवन में सब कुछ पाकर भी कुछ नहीं पाया है. उन्हें तब अहसास होता है कि पैसे से धन्ना सेठ होने के बावजूद भी वे लोग चैन तथा सुकून में बहुत गरीब हैं.

वक्त गुजर जाने पर सिर्फ प्रख्यात गायक किशोर कुमार का वह गाना गुनगुनाने के अतिरिक्त कुछ नहीं रह जाता है जिसमे उन्होंने गाया है कि “कोई लौटा दे मेरे बीते हुए दिन, बीते हुए दिन मेरे प्यारे पल छिन.“

आखिर हम सभी बहुतायत में ऐसा क्यों करते हैं कि पहले तो स्वर्ण मृग की तरह प्रतिबिंबित उन सभी तृष्णाओं को ही परम लक्ष्य मानकर उनका तेजी से पीछा करते हैं.

लेकिन जब हमें यह पता चलता है कि ये सब तो मात्र एक छलावा है तब हम उन परिस्थितियों को कोसते हुए अपने पुराने दिनों को दुखी होकर याद करते हैं.

Destiny plays an important role also


हर कार्य को करने का एक विशेष समय नियति द्वारा तय है तथा नियति ने मनुष्य को बौद्धिक तथा मानसिक रूप से इसीलिए मजबूत बनाया है कि वह दूसरे जानवरों से अलग हो.

जो कार्य बचपन में सुकून तथा आनंद देते हैं वही कार्य जवानी में अच्छे नहीं लगते हैं तथा जो कार्य जवानी में अच्छे लगते हैं वे कार्य बुढ़ापे में अच्छे नहीं लगते हैं.

हर कार्य तथा शौक करने की निश्चित उम्र तथा समय होता है तथा वह समय बीतने के पश्चात वे कार्य शायद निरर्थक लगने लग जाते हैं.

ईश्वर ने शायद बहुत मिन्नतों के पश्चात हमें इंसानी जीवन बक्शा है तथा इतने जतन से प्राप्त यह जीवन व्यर्थ नहीं जाना चाहिए. हर पल, हर क्षण को भरपूर आनंद के साथ जीना ही ईश्वर के दिए हुए जीवन के साथ न्याय करना है.


वक्त इस तरह से गुजरना चाहिए कि हमें कभी भी गुजरे वक्त का अफसोस नहीं हो. हमें कभी भी यह नहीं लगना चाहिए कि हमारे कुछ कार्य वक्त की कमी के कारण अधूरे रह गए हैं.

हम में से अधिकतर लोग जीवन को सिर्फ एक ही तरीके से जीते हैं. जब विद्यार्थी जीवन होता है तब हम सिर्फ और सिर्फ पढ़ाई में लगे रहते हैं तथा जब जवान होते हैं तो जीवन का लक्ष्य सिर्फ और सिर्फ कमाई बन जाता है.

हम हमेशा भविष्य में ही जीते हैं तथा वर्तमान समय को भी भविष्य के लिए ही काम में लेते हैं. ठीक है भविष्य के बारे में सोचना चाहिए नहीं तो इंसान तथा जानवर में फर्क क्या रह जायेगा परन्तु हमेशा भविष्य में रहना भी नुकसानदायक होता है.

Live always in present not in past or future


कल्पना करना तथा उसे साकार करना बहुत अच्छी बात है परन्तु कल्पना करके उसे साकार बनाने के लिए हमेशा लगे रहना समझदारी नहीं है. हमें भविष्य को ध्यान में रखकर वर्तमान में जीवन जीना चाहिए.

अगर हम वर्तमान को अपने मनमाफिक तरीके से नहीं जी पाते हैं तब हमें भविष्य में इसी वर्तमान के लिए, जो कि भूतकाल बन चुका होता है, बहुत अफसोस होता है तथा हम फिर भूतकाल के लिए पछताते हैं.

हमारा जीवन पछताने में ही बीत जाता है. पहले हम भविष्य की चिंता करके दुखी होते रहते हैं तथा बाद में भूतकाल का अफसोस करके दुखी होते हैं. इन सभी परिस्थितियों का एक ही निदान है कि हमें हमारा जीवन सिर्फ और सिर्फ वर्तमान में ही जीना चाहिए.

जब बचपन है तब बचपन का पूर्णरूपेण आनंद लेना चाहिए तथा जब जवानी हो तो उसे अच्छी तरह से आनंद स्वरुप गुजारना चाहिए ताकि इन दोनों समय को लेकर बुढ़ापे में किसी भी तरह का कोई अफसोस नहीं हो तथा बुढ़ापा भी आनंददायक तरीके से बीत सके.

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Ramesh Sharma
M Pharm, MSc (Computer Science), MA (History), PGDCA, CHMS

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