Life Me Music Kyon Necessary Hai?

Life Me Music Kyon Necessary Hai?


life me music kyon necessary hai, importance of music in life, how music affects our daily life, what music brings to our life, what is power of music, what can music teach us, music is meditation, music therapy

life me music kyon necessary hai

जीवन में संगीत क्यों जरूरी है?


संगीत एक बहुत वृहद शब्द है जिसमे प्रमुख रूप से गायन और वादन शामिल है. संगीत के दुनियाभर में अनेक रूप मौजूद हैं और सभी लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से संगीत से जुड़े रहते हैं.

हम मूलतः पाश्चात्य और भारतीय संगीत को जानते हैं. पाश्चात्य और भारतीय संगीत में बहुत ज्यादा फर्क होता है.

Difference between indian and western music


पाश्चात्य संगीत बहुत ऊँचे सुरों में गाया और बजाया जाता है और भारतीय संगीत मधुरता लिए हुए होता है. दोनों तरह के संगीत के अपने श्रोता है जिन्हें इससे बहुत ज्यादा लगाव होता है.

भारतीय संगीत के भी कई रूप होते हैं तथा इसका चलन आदिकाल से ही है. संगीत के विभिन्न रूप हुआ करते हैं. संगीत का आधार सात सुर है जिन पर सभी राग आधारित है.

राग आधारित संगीत को शास्त्रीय संगीत कहते हैं. पुराने जमाने में भी संगीत उतना ही ज्यादा लोकप्रिय था जितना की आज.

Music is an integral part of our culture


उस जमाने में यह मंत्रोच्चार, भजन कीर्तन से लेकर लोकगीत तक के रूप में जनमानस में समाया रहता था. राजा और प्रजा दोनों ही संगीत प्रेमी हुआ करती थी.

मुगल शहंशाह अकबर के बारे में तो हमें पता ही है कि उनके दरबार में नवरत्न हुआ करते थे जिनमें एक रत्न संगीत सम्राट तानसेन भी थे.

तानसेन के बारे में तो यहाँ तक प्रसिद्ध है कि उनके संगीत में एक जादू था जो श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देता था. जब तानसेन राग दीपक गाते थे तो बुझे हुए दीपक जल उठते थे और जब वह राग मल्हार छेड़ते थे तो बारिश होने लग जाया करती थी.

इसी तरह हमने कृष्ण की दीवानी मीराबाई के बारे में भी सुना है कि वह सम्पूर्ण कृष्ण भक्ति भजन कीर्तन करके किया करती थी.

मीराबाई अपने भजनों के माध्यम से कृष्ण भक्ति में इस प्रकार से डूब जाया करती थी कि वो अपनी सुधबुध खोकर ईश्वर का सामीप्य प्राप्त कर लेती थी.

भारतीय संस्कृति की अधिकतर परम्पराएँ वैज्ञानिक रूप से विकसित है जिनका सम्बन्ध इंसान के स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है.

परम्पराएँ इस तरह से प्रचलित की जाती थी कि उन्हें सभी लोग स्वीकार करें और इस स्वीकार्यता बढ़ानें के लिए इन्हें धर्म, संस्कृति और संगीत से जोड़ दिया जाता था. पुराने लोग संगीत प्रेमी हुआ करते थे परिणामस्वरूप वे मानसिक रूप से स्वस्थ रहते थे.


अब तो यह बात आधुनिक विज्ञान ने भी सिद्ध कर दी है कि संगीत कई प्रकार की मानसिक बीमारियों से बचाता है तथा इसकी मदद से मानसिक तनाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

संगीत एक प्रकार का ध्यान है जो कि योग की ही श्रेणी में आता है जिसे ध्यान योग कहा जाता है. संगीत में ऐसा जादू होता है कि आदमी अपनी सुधबुध खो देता है और अपने आप को पूर्णतया उसी में ही समाहित कर देता है.

संगीत में डूबे हुए आदमी को दीन दुनिया से कोई लेना देना नहीं होता है और उसकी मानसिक स्थिति खो जाने वाली होती है. संगीत एक प्रकार की साधना है जिसमे साधक को शान्ति के साथ-साथ ईश्वर प्राप्ति की भी अनुभूति होती है.

एक सच्चा संगीतज्ञ अपनी संगीत रुपी साधना से रोजाना ईश्वर का ध्यान करता है तथा उसे ईश्वर प्राप्ति का अहसास भी होता रहता है.

गायन और वादन के अतिरिक्त किसी भी तरह के संगीत को सुनना भी बहुत प्रभावकारी होता है बशर्ते वो श्रोता को पसंद हो.

मधुर संगीत शान्ति और सुकून प्रदान करता है तथा कर्कश संगीत शान्ति और सुकून को छीन कर शोर में तब्दील हो जाता है. शोर हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक है.

जब से सिनेमा जगत ने संगीत का प्रयोग प्रारंभ किया है तब से संगीत आम जन में काफी हद तक फैल गया है. अतः हमें अपनी मानसिक शांति के लिए संगीत के किसी न किसी रूप से अवश्य जुड़ा होना चाहिए.

About Author

Ramesh Sharma
M Pharm, MSc (Computer Science), MA (History), PGDCA, CHMS

Connect with us

Follow Us on Twitter
Follow Us on Facebook
Subscribe Our YouTube Travel Channel
Subscribe Our YouTube Healthcare Channel

Disclaimer

इस लेख में दी गई जानकारी विभिन्न ऑनलाइन एवं ऑफलाइन स्त्रोतों से ली गई है जिनकी सटीकता एवं विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है. हमारा उद्देश्य आप तक सूचना पहुँचाना है अतः पाठक इसे महज सूचना के तहत ही लें. इसके अतिरिक्त इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी.

अगर आलेख में किसी भी तरह की स्वास्थ्य सम्बन्धी सलाह दी गई है तो वह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर लें.

आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं एवं कोई भी सूचना, तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार N24.in के नहीं हैं. आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति N24.in उत्तरदायी नहीं है.

0 Comments