Medicines Ke Effect Aur Side Effect Kya Hote Hain?

Medicines Ke Effect Aur Side Effect Kya Hote Hain?


medicines ke effect aur side effect kya hote hain, what are the effects and common side effects of medicines, why drugs should be avoided, working of medicines, working of drugs, effects of drugs, common side effects of drugs, side effects of medicines, allopathic medicines, allopathic drugs, medicines, allopathy versus ayurveda, symptomatic relief by medicines, treatment by medicines, how allopathic medicine cure disease


मेडिसिन्स के इफ़ेक्ट और साइड इफ़ेक्ट क्या होते हैं?


हम सभी बीमार पड़ते रहते हैं तथा बीमार होते ही हमें सबसे पहले दवाइयों की याद आती है. हम थोड़ी सी भी तकलीफ सहन करना नहीं चाहते और तुरंत दवा ले लेते हैं.

बहुत बार तो हम बिना किसी डॉक्टर को दिखाए खुद ही अपनी मनमर्जी से दवा ले लेते हैं. दवा लेते वक्त हमारे दिमाग में सिर्फ यही बात रहती है कि हम जल्दी से जल्दी स्वस्थ हो जाएँ.

क्या हमने कभी सोचा है कि ये जो हम बात-बात पर हर छोटी बड़ी बीमारी के लिए दवाइयाँ लेते रहते हैं उसका हमारे शरीर पर क्या असर पड़ता है?

What are the system of medicine in India?


भारत में बीमारियों के उपचार के लिए कई प्रकार की चिकित्सा पद्धति मौजूद है जिन्हें एलोपैथिक, आयुर्वेदिक, होम्योपैथिक, यूनानी, एक्यूप्रेशर, एक्यूपंचर, नेचुरोपैथी आदि के नाम से जाना जाता है.

इन सभी चिकित्सा पद्धतियों में आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति विशुद्ध रूप से भारतीय चिकित्सा पद्धति है जिसका उपयोग हजारों नहीं लाखों वर्षों से भारत में होता आया है. आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति का जिक्र तो रामायण में भी मिलता है.

यह बहुत प्राचीन चिकित्सा पद्धति है जिसमे प्राकृतिक स्त्रोतों से प्राप्त जड़ी बूटियों से उपचार किया जाता है. आयुर्वेद में दवाइयों को जड़ी बूटियाँ कहा जाता है जो कि पूर्णतया प्राकृतिक स्त्रोतों जैसे पेड़ पौधों, चट्टानों, आदि से प्राप्त की जाती है.

जड़ी बूटियों का स्त्रोत पूर्णतया प्राकृतिक होने की वजह से इनके साइड इफेक्ट्स काफी कम होते हैं. वर्तमान में सभी चिकित्सा पद्धतियों में सबसे अधिक लोकप्रिय चिकित्सा पद्धति एलोपैथी है.

Why allopathic treatment so popular?


इस चिकित्सा पद्धति के सबसे अधिक लोकप्रिय होने का प्रमुख कारण बीमारी का तुरंत निदान है क्योंकि इस पद्धति में काम में ली जाने वाली दवाइयाँ तुरंत असर करती है.

आज के समय में हर इंसान एक भागदौड़ में व्यस्त है और किसी के पास भी समय नहीं है. हर कोई बीमारी होते ही उसके लक्षणों से मुक्ति पाकर तुरंत ठीक होना चाहता है. इस प्रकार फास्ट सिम्प्टोमेटिक रिलीफ ही इसकी लोकप्रियता की जड़ है.

साथ ही इस पद्धति में शल्यक्रिया यानि ऑपरेशन के भी बहुत से अत्याधुनिक तरीके उपलब्ध हैं, जिनकी वजह से कई असाध्य रोगों का इलाज किया जा सकता है. अपने इन्ही दोनों गुणों के कारण यह एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति अन्य सभी पद्धतियों पर बहुत भारी पड़ रही है.

medicines ke effect aur side effect kya hote hain

सभी चीजों के पॉजिटिव और नेगेटिव दोनों तरह के आस्पेक्ट्स होते हैं. एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति भी इससे अछूती नहीं है. इन दवाओं के इफ़ेक्ट के साथ-साथ बहुत से साइड इफेक्ट्स भी होते हैं.

सभी चिकित्सा पद्धतियों में दवा के निर्माण और उपयोग की प्रक्रिया भिन्न होती है. जिन चिकित्सा पद्धतियों में प्राकृतिक स्त्रोतों से प्राप्त दवाओं और तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है उनके साइड इफेक्ट्स नगण्य होते हैं.

लेकिन जिन चिकित्सा पद्धतियों में कृत्रिम स्त्रोतों से प्राप्त दवाओं का उपयोग किया जाता है उनमे दवाओं के साइड इफेक्ट्स बहुतायत में देखने को मिलते हैं.

एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति इसी प्रकार की पद्धति है जिसमे दवाओं के स्त्रोत कृत्रिम होने के कारण इनका हमारे शरीर पर काफी ज्यादा हानिकारक प्रभाव पड़ता है.

एलोपैथिक दवाइयाँ मुख्य रूप से सिंथेटिक प्रक्रियाओं से बनती हैं जिन्हें प्रयोगशालाओं में रिसर्च करके बनाया जाता है.

अधिकांशतः ये दवाएँ शुद्ध रूप से केमिकल ही होती है, अतः हम जब भी कोई एलोपैथिक दवा लेते हैं इसका मतलब हम अपने शरीर में उस दवा रुपी केमिकल को ग्रहण करते हैं.

प्रत्येक दवा हमारे शरीर पर किसी न किसी तरह का प्रभाव डालती है. इन दवाओं द्वारा हमारे शरीर पर जो भी प्रभाव पड़ता हैं उसे फार्माकोलोजिकल इफेक्ट्स कहते हैं जो कि फायदेमंद और हानिकारक दोनों तरह के हो सकते हैं.

How allopathic drugs work?


दवाओं के शरीर पर पड़ने वाले प्रभाव को समझने से पहले हमें यह समझना होगा कि हमारे शरीर में दवाएँ किस तरीके से काम करती हैं.

जब भी हम कोई दवा खाते हैं तो वह दवा सबसे पहले हमारे पेट में और फिर आँतों में जाती है. यहाँ से इस दवा का खून में अवशोषण होता है और ये अवशोषित दवा खून के जरिये लीवर में पहुँचती है.

हमारा लीवर इस दवा को कई प्रकार से बदल देता है जिसे मेटाबोलिज्म कहते है. अब यह दवा हार्ट द्वारा खून के जरिये शरीर के सभी हिस्सों और अंगों में पहुँचती है.

चूँकि दवा खून के जरिये शरीर के सभी अंगों में पहुँचती है तो इन सभी अंगों पर इस दवा का प्रभाव या असर होना भी निश्चित है.

इस प्रकार प्रत्येक खाई गई दवा का हमारे शरीर के सभी अंगों जैसे हार्ट, लीवर, किडनी, पेट, आँते, फेंफडे, मस्तिष्क, आँखों आदि पर असर होता है, चाहे उसकी वहाँ जरूरत हो या न हो.

शरीर के जिस अंग को इस असर की जरुरत होती है तो उस अंग के लिए यह असर फायदेमंद यानि ट्रीटमेंट बन जाता है लेकिन शरीर के जिस अंग को इसकी जरूरत नहीं होती वहाँ पर ये अनचाहा प्रभाव नुकसानदायक यानि साइड इफ़ेक्ट बन जाता है.

इसे हम इस प्रकार समझ सकते हैं कि जब हम दस्त की दवा लेते हैं तो यह दवा हमारी आँतो की क्रमाकुंचन गति (मोटिलिटी) को कम कर देती है. इस वजह से आँतो के अन्दर का मटेरियल जल्दी से शरीर से बाहर नहीं निकलता है और दस्त रुक जाते हैं.


चूँकि इस दवा का असर शरीर की सभी स्मूथ मसल्स की गतिशीलता को कम करने की वजह से होता है, लेकिन यह दवा तो शरीर की सभी स्मूथ मसल्स की मोटिलिटी को कम कर देती है फिर चाहे वह मसल्स आँतों की हो, हृदय की हो या फिर गर्भाशय की हो.

कहने का मतलब यह है कि शरीर के जिन जिन अंगों में स्मूथ मसल्स है उस अंगों को यह दवा प्रभावित करेगी.

आँतो की गति कम होने से यहाँ पर इस दवा का असर ट्रीटमेंट के रूप में दिखेगा और जिसके कारण दस्त रूक जायेंगे परन्तु शरीर के अन्य स्मूथ मसल्स वाले अंगों पर जहाँ इस प्रभाव की जरूरत नहीं थी वहाँ यह असर साइड इफेक्ट कहलायेगा.

इसी तरह सिरदर्द की दवाओं की बात करें तो इन दवाओं से सिरदर्द ठीक होने के साथ-साथ पेट में एसिड का बिना वजह सेक्रेशन होने लगता है. इस वजह से लम्बे समय में एसिसिटी की प्रॉब्लम होना शुरू हो जाती है.

Common side effects of allopathic treatment


हर दवा के कुछ न कुछ साइड इफेक्ट्स होते हैं जिनमे से कुछ सामान्य साइड इफेक्ट्स होते हैं जैसे उबकाई आना, उल्टी होना, जी घबराना, सरदर्द होना, चक्कर आना, घबराहट होना, उनींदापन, निद्रा आना, एसिडिटी होना, पेट में अल्सर हो जाना, पेट दुखना, कब्ज या दस्त होना, वजन बढ़ना या घटना, शरीर में कंपकपी होना, आदि.

गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को ये दवाएँ लेते वक्त बहुत सावधानी की आवश्यकता होती है क्योंकि ज्यादातर दवाएँ इन पर बहुत से अनचाहे अधिक प्रभाव दिखा सकती है.

कुछ दवाओं के बहुत ज्यादा साइड इफेक्ट्स होते हैं जैसे कैंसर में ली जाने वाली दवाएँ, दिमाग पर असर करने वाली दवाएँ, एंटीबायोटिक्स, आदि.

Excessive use of antibiotics


एंटीबायोटिक्स का बहुत ज्यादा प्रयोग भी बहुत घातक होता है क्योंकि धीरे-धीरे माइक्रोब्स इनके आदि होकर इनके अनुसार ढल जाते हैं जिसके फलस्वरूप धीरे-धीरे इनका असर समाप्त होने लगता है.

एंटीबायोटिक्स से रेसिस्टेंट माइक्रोब्स सुपर बग के रूप में सामने आने लग गए हैं जिन पर सभी एंटीबायोटिक्स बेअसर होती है.
निश्चित रूप से हर दवा के इफेक्ट और साइड इफेक्ट दोनों होते है. अभी तक एलोपैथी में ऐसी कोई दवा नहीं बनी है जिसके साइड इफेक्ट न होकर केवल और केवल इफेक्ट ही हों.

दवा एक बीमारी को तात्कालिक रूप से समाप्त करती है परन्तु उसके साथ ही साथ दूसरी कई बीमारियों को जन्म भी दे सकती है.

यहाँ यह ध्यान देने योग्य बात है कि एलोपैथिक दवाइयाँ मुख्यतया बीमारी के लक्षणों को दबा कर हमें बीमारी के समाप्त होने का आभास कराती है. इनकी वजह से बीमारी हमेशा के लिए समाप्त नहीं होती है वरन कुछ वक्त के लिए उसके लक्षण प्रकट नहीं होते हैं.

अतः हमें जहाँ तक हो सके एलोपैथिक दवाओं से तब तक दूर रहना चाहिए जब तक कोई बहुत ज्यादा आवश्यकता नहीं हो और बात बात में दवा खाने की आदत से तो बचना ही चाहिए.

About Author

Ramesh Sharma
M Pharm, MSc (Computer Science), MA (History), PGDCA, CHMS

Connect with us

Follow Us on Twitter
Follow Us on Facebook
Subscribe Our YouTube Travel Channel
Subscribe Our YouTube Healthcare Channel

Disclaimer

इस लेख में दी गई जानकारी विभिन्न ऑनलाइन एवं ऑफलाइन स्त्रोतों से ली गई है जिनकी सटीकता एवं विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है. हमारा उद्देश्य आप तक सूचना पहुँचाना है अतः पाठक इसे महज सूचना के तहत ही लें. इसके अतिरिक्त इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी.

अगर आलेख में किसी भी तरह की स्वास्थ्य सम्बन्धी सलाह दी गई है तो वह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर लें.

आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं एवं कोई भी सूचना, तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार N24.in के नहीं हैं. आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति N24.in उत्तरदायी नहीं है.

0 Comments