Mother-in-Law and Daughter-in-Law - An Emotional Story

Mother-in-Law and Daughter-in-Law - An Emotional Story


mother-in-law and daughter-in-law an emotional story, ghar ghar ki kahani, sas aur bahu, sas aur bahu ki kahani, sas bahu ki kahani, sas bhi kabhi bahu thi

mother-in-law and daughter-in-law an emotional story

सास और बहू - एक भावनात्मक कहानी


विकास की माताजी का स्वभाव कुछ कठोर किस्म का था और वो सास के ओहदे पर पूर्ण शिद्दत के साथ विराजमान थी. विकास की अभी नई नई शादी हुई थी और वो अरमानों के सपने संजोये भावी जिन्दगी के बारे में सोच रहा था.

विकास की पत्नी शिखा कुछ आधुनिक विचारो वाली महिला थी. उसने अंग्रेजी माध्यम के स्कूल में शिक्षा ग्रहण की थी और बाद में विज्ञान विषय में पोस्ट ग्रेजुएशन की उपाधि हासिल की थी.

शादी, सास-ससुर, देवर, ननद आदि के बारे में उसके काफी सकारात्मक विचार थे. विकास घर का बड़ा पुत्र था वह एक निजी काँलेज में व्याख्याता था. उसके एक छोटा भाई और एक छोटी बहन थी.

पिताजी वन विभाग में बड़े अधिकारी थे और वो परिवार से दूर दूसरे शहर में रहते थे. माताजी घरेलू महिला थी जो ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं थी.

जैसा की हर घर में होता है कि शादी के कुछ दिनों तक नई दुल्हन को कुछ भी कार्य नहीं करने दिया जाता है और जैसे ही ये कुछ दिन गुजरते हैं सभी बकाया कार्यो को सूद सहित वसूल कर लिया जाता है. शिखा के साथ भी कुछ ऐसा ही होने लगा. शिखा के अरमान और उसकी इच्छाएँ दम तोड़ने लगे.

mother-in-law and daughter-in-law story


अधिकतर सास की ये जन्मजात प्रवृति होती है कि एक तरफ तो वो अपनी बहू को हमेशा गुडिया की तरह सजी हुई देखना चाहती है ताकि दुनिया में इस बात को प्रदर्शित किया जा सके कि वो अपनी बहू को अपनी बेटी की तरह से रखती है दूसरी तरफ वो अपनी बहू को जिम्मेदारी सोंपने के बहाने घर के सम्पूर्ण कार्यो में उलझा देती है.

बहू का कार्य यही समझा जाता है कि वो घर के हर इंसान का ध्यान रखे, उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति करे, सास ससुर की सेवा करे और खुद के कोई अरमान इच्छाएँ न पाले.

सास और बहू का रिश्ता भी बड़ा अजीब होता है. कहने को तो यह माँ बेटी के समान कहा जाता है परन्तु इसके इस रूप के दर्शन बहूत दुर्लभ होते हैं.

सास जब बहू के रूप में होती है तब उसके मन में जो भावनाएँ उसे उद्वेलित करती है वो भावनाएँ तब समाप्त हो जाती है जब वो सास की भूमिका में होती है.

सास की भूमिका को वो फिर इस प्रकार सत्य ठहराती है कि हमारे साथ तो ऐसा ऐसा हुआ था और हम तो कुछ भी विरोध नहीं करते थे. इस दुनिया में औरत ही औरत के दर्द को नहीं समझती है शायद औरत ही औरत की सबसे बड़ी दुश्मन होती है.

Sas aur bahu ki kahani


औरत की गुलामी से आजादी का, पुराने अंधविश्वासों का, जुल्मों के विरोध को दबाने में औरत की भूमिका अग्रणी होती है. अधिकतर परिस्थितियों में मर्द को इन घरेलू मसलों में कोई रुचि नहीं होती है.

शिखा की सास ने भी अपना बनावटी सास का चोला उतार फेका और अपने पारंपरिक सास वाली भूमिका में आ गई थी.

शिखा का पति विकास के पास इन सभी घरेलू परिस्थितियों को देखकर नजरंदाज करने के अलावा और कोई चारा नहीं था. एक तरफ जननी थी तो दूसरी तरफ अर्धांगिनी थी, समझ में नहीं आता था क्या करे.

शिखा कई बार विकास को अपनी सास के बारे में कुछ शिकायत करती थी तो विकास मौन रह जाता था. कभी कभी हिम्मत करके माताजी के पास बात करने जाता भी था परन्तु बिना बात किये वापस लौट आता था.

इस दुनिया में विकास जैसे अनगिनत लोग हैं जो माँ और पत्नी के बीच के अंतर्द्वंद के बीच पिसते रहते हैं परन्तु सही को सही और गलत को गलत नहीं ठहरा पाते.

विकास के पिता बहूत सुलझे हुए इंसान थे. एक बार विकास ने अपने पिता को फोन किया और उन्हें घरेलू परिस्थितियों के सम्बन्ध में कुछ इशारा किया तो उसके पिता ने उसे जो कहा वो शायद बहूत कम पिता कह पाते हैं.

विकास के पिता ने कहा कि “बेटा में तेरी माँ को इतने वर्षो से जानता हूँ और उसे अब बदल पाना असंभव है. तुम लोग अपना जीवन इन परिस्थितियों में क्यों व्यर्थ कर रहे हो, अच्छा होगा कि तुम शिखा सहित किसी दूसरी जगह रहो. शिखा से भी मेरी तरफ से माफ़ी मांग लेना."

विकास ने शिखा को जब इस बातचीत के बारे में बताया तो शिखा की नजर में अपने ससुर की इज्जत पहले से काफी ज्यादा बढ़ गई.

वक़्त गुजरने के साथ साथ विकास के छोटे भाई और बहन की भी शादी हो गई. विकास का छोटा भाई थोड़ा मुहफट और स्पष्टवादी था.


विकास जैसी परिस्थितियाँ जैसे ही उसके जीवन में आई तो उसने अपनी माँ को इस बारे में स्पष्ट बता दिया और कुछ वक्त बाद उसी शहर में अपने दूसरे घर में जाकर रहने लग गया.

विकास फिर उन्ही परिस्थितियों में जीने लगा. शिखा ने स्वयं ही कुछ न कुछ करने का निर्णय लिया उसे समझ आ गया था कि विवाह के वक्त जो पुरुष सात फेरे लेकर जो वचन देता है वो पूर्ण कर पाने में बहूत बार असहाय हो जाता है.

शिखा ने एक काँलेज में व्याख्याता की नौकरी कर ली थी और साथ ही साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारियों में जुट गई. घर से बाहर निकलने पर उसका मन दूसरी चीजों की तरफ भी लगने लगा और उसका मन काफी हल्का महसूस करने लगा.

विकास एक प्रकृति पसंद मनमौजी किस्म का इंसान था. प्राकृतिक जगहों पर जाने और वहाँ प्रकृति की सुन्दरता को निहारने में उसे बड़ा सुकून मिलता था. शिखा की बैंक में नौकरी लग गई और घर से 10-12 किलोमीटर की दूरी पर ही उसकी पोस्टिंग हो गई.

सरकारी नौकरी लग जाने से एक अलग किस्म का आत्मविश्वास आ जाता है ऐसा ही कुछ शिखा के साथ हुआ. वो अब पहले से ज्यादा बोल्ड और आत्मविश्वासी हो गई थी.

माताजी का रवैया पहले जैसा ही था परन्तु अब शिखा के रवैये में कुछ बदलाव आने लगा. जहाँ पहले वो हर बात को शिरोधार्य कर लेती थी वहाँ वो अब गलत बात का प्रतिकार करने लगी.

सत्ता चाहे साम्राज्य की हो या फिर घर की, अगर विद्रोह होता है तो उसे किसी न किसी प्रकार से कुचलने की कोशिश होती है.

विकास अब भी उसी सोच से बंधा हुआ था कि जब में पहले नहीं बोला तो अब क्यों बोलू. वह पहले भी अपने फर्ज से भागता रहा और अब भी भागना चाहता है.

अचानक से विकास के पिता का देहांत हो गया. विकास के लिए ये बड़ा झटका था परन्तु वक्त से बढ़कर कोई इलाज नहीं होता है. माताजी के स्वभाव में अब थोडा बहूत परिवर्तन आने लगा था.

उम्र जैसे जैसे बढती जाती है तब इंसान की सत्ता स्वयं के शरीर पर ही नहीं चल पाती है किसी और पर चल पाना असंभव हो जाता है.

विकास उनके अकेलेपन को दूर करने के लिए घंटों उनके साथ बैठा रहता था. धीरे धीरे जीवन इसी ढ़र्रे में ढलकर चलने लगा और आज तक चल रहा है.

About Author

Ramesh Sharma
M Pharm, MSc (Computer Science), MA (History), PGDCA, CHMS

Connect with us

Follow Us on Twitter
Follow Us on Facebook
Subscribe Our YouTube Travel Channel
Subscribe Our YouTube Healthcare Channel

Disclaimer

इस लेख में दी गई जानकारी विभिन्न ऑनलाइन एवं ऑफलाइन स्त्रोतों से ली गई है जिनकी सटीकता एवं विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है. हमारा उद्देश्य आप तक सूचना पहुँचाना है अतः पाठक इसे महज सूचना के तहत ही लें. इसके अतिरिक्त इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी.

अगर आलेख में किसी भी तरह की स्वास्थ्य सम्बन्धी सलाह दी गई है तो वह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर लें.

आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं एवं कोई भी सूचना, तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार N24.in के नहीं हैं. आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति N24.in उत्तरदायी नहीं है.

0 Comments