Success Ke Liye Time Management Kaise Karen?

Success Ke Liye Time Management Kaise Karen?


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success ke liye time management kaise karen

सफलता के लिए समय का प्रबंधन कैसे करें?


इंसान अपनी जिन्दगी में सब कुछ पाने का दावा कर रहा है परन्तु वह अभी तक गुजरे हुए समय को पाने में या फिर समय की गति से छेड़छाड़ करने में सक्षम नहीं हो पाया है.

इन्सान बहुत सी प्राकृतिक चीजों के साथ छेड़छाड़ करके उन्हें अपने हिसाब से बदलने के प्रयासों में लगा हुआ है जिनमे से कुछ में वह कुछ हद तक सफल भी हुआ है.

समय अपनी निश्चित गति से आगे बढ़ता ही जाता है तथा इंसान के पास इसे बेबसी से देखने के अलावा और कोई चारा नहीं है.

समय अविनाशी है तथा इसकी गतिशीलता ही इसकी एकमात्र पहचान है. इस समय चक्र की गतिशीलता के कारण ही सारी प्रकृति चलायमान है. हर चीज का समय के साथ प्रत्यक्ष तथा परोक्ष रूप से सम्बन्ध होता है.

यदि समय की गति अवरुद्ध हो गई तो प्रकृति का समस्त सृजन समाप्त हो जाएगा तथा ब्रह्माण्ड में कुछ भी नहीं रहेगा. अगर स्पष्ट रूप से कहा जाए तो समय चक्र के बिना ब्रह्माण्ड की कल्पना भी बेमानी है.

समय रुपी धारा अपनी स्थिर गति से अनवरत बहती रहती है तथा इसका बहाव ही जीवन है. जिसके लिए भी यह बहाव मंद होकर रूक जाता है उसे यह धारा अपने साथ बहाकर ले जाती है.

मानव को अपना सम्पूर्ण जीवन इस धारा के साथ बहकर तथा इसके सानिध्य में ही काटना होता है. समय की धारा ही मानव जीवन को तीन अलग-अलग रूपों जैसे बचपन, जवानी तथा बुढ़ापे में परिभाषित करती है.

Different forms of time


समय वही रहता है परन्तु जीवन के रूप बदलते रहते हैं तथा इन बदलते हुए रूपों में मानव की जरूरतें भी बदलती रहती है. जो जरूरत बचपन में होती है, वह जवानी में नहीं होती तथा जो जरूरत जवानी में होती है, वह बुढ़ापे में नहीं होती.

बुढ़ापा सभी जरूरतों को त्यागकर समय के साथ मिलकर चलने का समय होता है क्योंकि बुढ़ापा आते-आते जीवन के बहुत कुछ राज फाश हो जाते हैं तथा इंसान को अपनी औकात समझ में आ जाती है.

समय का कोई मूल्य नहीं होता है, यह अमूल्य होता है परन्तु फिर भी हम दैनिक जीवन में समय को बिकते हुए देखते हैं.

अगर आप किसी कंपनी में नौकरी कर रहे हैं तो इसका साफ-साफ मतलब है कि आप उस कंपनी को अपना नियत समय बेचकर उसके लिए काम कर रहे हैं या फिर वो कंपनी अपने लिए आप का समय खरीद रही है.

हमारा जीवन तथा इसे जीने के लिए मिलने वाला समय दोनों अमूल्य है क्योंकि ईश्वर ने सभी इंसानों को धरती पर समान समय दिया है तथा यह इंसानों पर छोड़ दिया है कि वे इसका उपयोग किस प्रकार करें.

Everybody has equal time in a day


ईश्वर ने सभी इंसानों के लिए एक दिन का कुल समय नियत कर रखा है जिसे इंसान ने चौबीस घंटों में बाँट रखा है. हर इंसान के पास एक दिन में सिर्फ चौबीस घंटे ही होते हैं फिर चाहे वो अमीर हो या फिर गरीब.

यह सोचने वाली बात है कि जब हर इन्सान के पास एक दिन में निश्चित समय होता है तो फिर क्या कारण है कि किसी के लिए ये वक्त बहुत कम होता है तथा किसी के लिए बहुत ज्यादा?

किसी इंसान का वक्त कैसे बीत जाता है उसे पता ही नहीं चलता तथा किसी इन्सान को वक्त बितानें के लिए सहारों की जरूरत महसूस होती है.


सभी के लिए यह बड़ा यक्ष प्रश्न है कि ईश्वर द्वारा दिए गए इस नियत समय को किस प्रकार बढ़ाया जाए? दरअसल समय बढ़ाने के लिए सिवाय समय के उचित प्रबंधन के अतिरिक्त और कोई दूसरा साधन नजर नहीं आता है.

अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए समय का बुद्धिमतापूर्ण विभाजन ही समय का प्रबंधन कहलाता है. जो इंसान समय की कीमत को समझता है वो इंसान चौबीस घंटों के समय को अपने कार्य तथा आवश्यकता के अनुसार विभक्त कर लेता है.

हमें सबसे पहले अपने कार्यों की प्राथमिकताएँ तय करनी चाहिए तथा फिर उन्हें समयानुसार इस प्रकार विभक्त करना चाहिए कि इन प्राथमिकताओं को दैनिक जीवन के अन्य कार्यों के साथ-साथ आसानी से पूर्ण कर सकें.

हमें हमारे कार्यों को ही एकमात्र प्राथमिकता बनाकर जीने का प्रयास नहीं करना चाहिए क्योंकि जीवन के लिए अन्य ऐसे कार्य भी बहुत महत्वपूर्ण होते हैं जो महत्वपूर्ण प्रतीत नहीं होते हैं.

समय के एक-एक पल का सदुपयोग होना चाहिए. हमें हमारे कार्यों का मूल्यांकन करके यह तय कर लेना चाहिए कि कौनसे कार्य हमारे लिए उपयोगी हैं तथा कौनसे अनुपयोगी.

यह सब इसलिए आवश्यक है क्योंकि हम अपना बहुत सा समय व्यर्थ के अनुपयोगी कार्यों में गवा बैठतें हैं.

कार्यों का उपयोगिता के अनुरूप विभाजन हमें अनुपयोगी कार्यों में समय व्यर्थ करने से बचाएगा तथा इस बचे हुए समय का सदुपयोग हम उपयोगी कार्यों को करने में कर सकते हैं.

अतः हमें यह भली भाँति समझ लेना चाहिए कि समय ईश्वर का ही एक रूप है जिसे हम काबू में नहीं कर सकते हैं.

समय अपनी गति से चलता है तथा उसे चलने के लिए हमारी आवश्यकता नहीं होती है बल्कि हमें अपने सभी कार्यों के लिए समय की आवश्यकता होती है.

समय का सदुपयोग करने के लिए हमें ही समय के साथ चलना होगा क्योंकि समय कभी किसी के साथ नहीं चलता है.

About Author

Ramesh Sharma
M Pharm, MSc (Computer Science), MA (History), PGDCA, CHMS

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