Valentine Day Ka Youth Par Kya Effect Padta Hai?

Valentine Day Ka Youth Par Kya Effect Padta Hai?


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वैलेंटाइन डे का युवावर्ग पर क्या प्रभाव पड़ता है?


नब्बे के दशक से शुरू हुआ वैलेंटाइन डे का प्रचलन बढ़ते-बढ़ते आज उस मुकाम पर पहुँच गया है जहाँ पर इसका मनाना अति आवश्यक सा हो गया है।

वह पीढ़ी जो नब्बे के दशक में पैदा हुई तथा जिसने बचपन से ही वैलेंटाइन डे के बारे में काफी कुछ सुना और देखा है उसके लिए तो यह एक पर्व की भाँति होता है। इसी देखा-देखी तथा आधुनिकता के प्रदर्शन के बीच पुरानी पीढ़ी भी इसे काफी हद तक स्वीकार कर चुकी है।

What is the effect of Valentine's Day on youth?


क्या हमारे लिए अपने प्रेम को प्रदर्शित करने के लिए वैलेंटाइन डे इतना आवश्यक हो गया है? क्या नब्बे के दशक से पहले प्रेम सम्बन्ध नहीं हुआ करते थे?

क्या वैलेंटाइन डे मना लेने भर से प्रेम को निश्छलता का सबूत मिल जाता है? क्या सभी लोग वैलेंटाइन डे का अर्थ और मतलब समझते हैं? आखिर भारत में वैलेंटाइन डे की शुरुआत क्यों और कैसे हुई?

उपरोक्त सभी प्रश्नों के बारे में हमें अधिक गहरे से विचार विमर्श करना होगा क्योंकि यह आधुनिक संस्कृति हमारी परम्परागत संस्कृति पर भारी पड़ती जा रही है।

आखिर हम वैलेंटाइन डे के नाम पर वैचारिक और सामाजिक कलुषता को बढ़ावा तो नहीं दे सकते हैं। इस दिवस के नाम पर खुले आम प्रेम के भोंडे प्रदर्शन की इजाजत नहीं दी जा सकती है।

पश्चिमी संस्कृति में विवाह को कोई सामजिक मान्यता नहीं हुआ करती थी तब एक आदमी ने पूर्व के देशों विशेषकर भारत की तरह विवाहों का प्रचलन पश्चिम में भी करवाया, उसी के नाम पर वैलेंटाइन डे मनाया जाता है।


पश्चिम के लोगों का इसे मनाना समझ में आता है क्योंकि उन्हें किसी ने विवाह के बारे में बताया था परन्तु हमारे देश में जहाँ विवाह की परम्परा लाखों वर्षों से चलती आ रही है वहाँ इसे मनाना बेमानी सा लगता है।

पश्चिम के देशों की सभ्यता और संस्कृति हमारी सभ्यता और संस्कृति से काफी भिन्न है। पश्चिम में विवाह पूर्व शारीरिक संबंधों को मान्यता दी जाती है परन्तु हमारी संस्कृति हमें इसकी इजाजत नहीं देती है।

हमारी संस्कृति के अनुसार विवाह सात जन्मों तक का एक पवित्र बंधन होता है परन्तु पश्चिम में विवाह एक तरह का समझौता सा होता है तथा यह कभी भी तोड़ दिया जाता है तथा तलाक काफी आम बात है।

जिस पश्चिम को विवाह की संस्कृति हमसे सीखनी पड़ी उस पश्चिम से हम वैलेंटाइन डे के नाम पर क्या सीख रहे हैं? क्या हम वैलेंटाइन डे के नाम पर सिर्फ और सिर्फ नंगेपन और खुलेपन को बढ़ावा नहीं दे रहे हैं?

वैलेंटाइन डे में सम्मिलित रूप से कई दिवस मनाये जाते हैं जिनमे से एक चुम्बन दिवस भी होता है। क्या हम यह मनाकर चुम्बन के प्रदर्शन को वैधानिकता प्रदान कर रहे हैं?

हमें हर संस्कृति की सिर्फ और सिर्फ अच्छी बातें ही ग्रहण कर अपने जीवन में उतारनी चाहिए। हमारी सभी पीढ़ियों को यह समझना होगा कि सड़कों और पार्कों पर प्रेम का प्रदर्शन करने से प्रेम, पवित्रता की ऊंचाइयाँ नहीं छू सकता है। प्रेम की परिणति विवाह होती है तथा प्रेम प्रदर्शन कतई भी आवश्यक नहीं है।

अभिभावकों की यह प्रमुख जिम्मेदारी बनती है कि वे अपने बच्चों को अच्छे और बुरे का भली भाँती ज्ञान करवाकर उनके सच्चे पथ प्रदर्शक बनें।

युवाओं को अपनी सभ्यता तथा संस्कृति के बारे में ज्ञान होने से वे अपने भले बुरे के बारे में समझकर अपनी परम्पराओं का पालन करने की ओर प्रवृत होंगे।

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Ramesh Sharma
M Pharm, MSc (Computer Science), MA (History), PGDCA, CHMS

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